उत्तराखंड

क्या हरक सिंह रावत होंगे कांग्रेस का सीएम चेहरा? चुनावी रणनीति में नए संकेत

अवनींद्र कमल
(एडिटर इन चीफ, द राउंड क्लॉक)

उत्तराखंड की सियासत में कांग्रेस के लिए जितने अवसर हैं, उससे ज्यादा कहीं चुनौतियां हैं। बेशक, नीट पेपर लीक विवाद कांग्रेस के लिए सिर्फ छात्र आंदोलन नहीं बल्कि राजनीतिक अभियान का आधार बनता दिख रहा है। उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में बेरोजगारी, पलायन, भर्तियों में विसंगतियां, महिला अपराध और युवाओं की नाराजगी चुनावी मुद्दों का प्रतीक बन चुका है। बावजूद इसके, धामी सरकार की उपलब्धियां इन प्रतीकों पर दांत गड़ाकर कर बैठी हैं। तिस पर कांग्रेस की कलह थमने का नाम नहीं ले रही। उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस सीएम के चेहरे के रूप में हरक सिंह रावत के नाम पर मुहर लगा सकती है। हालांकि यह अभी फाइनल नहीं हुआ है। लेकिन दिल्ली दरबार में मंथन चल रहा है।

2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तराखंड में कांग्रेस का खाता नहीं खुला। पिछले विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद लचर रहा। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से लगातार झटका खा रही कांग्रेस युवाओं के मुद्दे पर अपनी राजनीति और रणनीति को धार देने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस के कारकुनों का आकलन है कि राज्य के युवा मतदाता जातीय समीकरणों से इतर रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे मुद्दों पर लामबंद हो सकते हैं। पिछले दिनों राजधानी देहरादून आए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने युवाओं की दुखती रगों पर हाथ रखकर कांग्रेस के हाथ को मजबूत करने का उपक्रम किया।

उल्लेखनीय यह भी है कि दिल्ली में 20 जून को शुरू हुआ आंदोलन संसद के मानसून सत्र के दौरान और तेज हुआ। राहुल गांधी प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में उतरे। संसद के भीतर राहुल गांधी ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और NEET विवाद पर चर्चा की मांग को लेकर लगातार सरकार को कठघरे में खड़ा किया। दिलचस्प यह है कि कांग्रेस जातीय पहचान या धार्मिक ध्रुवीकरण की बजाय सीधे युवाओं और महिलाओं के मुद्दे पर अपनी राजनीतिक ताकत का उभार चाहती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस के सहोदर संगठन अगर कलह से उबर कर एकजुट रहते हैं तो बीजेपी को चुनौती दी जा सकती है।

इसी विश्वास के आधार पर कांग्रेस नेतृत्व सन 27 के विधानसभा चुनाव की तैयारी करवा रहा है। अगर देखें तो कांग्रेस पार्टी ने ‘मिशन-2027’ के तहत जनसंपर्क अभियान, संगठनात्मक बैठकें और चुनावी कार्यालय का उद्घाटन तेज कर दिया है। पार्टी मुख्य रूप से परिवर्तन संकल्प यात्रा के जरिए सत्तारूढ़ भाजपा सरकार को घेरने की रणनीति बना रही है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, प्रीतम सिंह, करण महरा और हरक सिंह रावत जैसे वरिष्ठ नेताओं को अलग-अलग जोन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बूथ स्तर पर मजबूती और आगामी घोषणापत्र (मेनिफेस्टो) की रूपरेखा तैयार करने के लिए पार्टी मुख्यालय में लगातार बैठकें हो रही हैं। इस बीच सूचना है कि जल्द ही कांग्रेस भी भाजपा की तर्ज पर वरिष्ठ नेता हरक सिंह रावत को अपना मुख्यमंत्री का चेहरा पेश कर सकती है।

हालांकि, हरीश रावत इस बात से सहमत नहीं हैं। जाहिर सी बात है कि अगर हरीश रावत बगावत करते हैं तो भाजपा को फायदा हुए बिना नहीं रहेगा। कांग्रेस की उत्तराखंड प्रभारी कुमारी शैलजा पार्टी में समन्वय बनाए रखने पर जोर देती आई हैं। लेकिन उसका कुछ खास असर अभी तक दिखाई नहीं दे रहा है। उधर, भाजपा में बूथ स्तर तक मजबूती के लिए सारे जतन पहले ही कर लिए गए हैं। धामी सरकार की उपलब्धियां, विकास के कार्य , 5 साल तक निर्बाध रूप से सरकार का संचालन , यूसीसी लागू करने, नकल विरोधी कानून, 34000 युवकों को नौकरियां, दिल्ली दून हाईवे की शुरुआत, तीर्थाटन और पर्यटन को बढ़ावा देने समेत कई ऐसे काम है जो सत्ता विरोधी लहर पैदा नहीं होने दे रहे।

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