उत्तराखंड

कुंभ मेले से पहले अखाड़ों में बढ़ी रार-तकरार, नेतृत्व और परंपराओं को लेकर विवाद तेज

अवनींद्र कमल

सन 2027 में धर्म नगरी हरिद्वार में होने वाले कुंभ मेले में स्नान को लेकर अखाड़ों में गुटबंदी और तनातनी तेज हो गई है। अब असली-नकली देवताओं को लेकर नया बखेड़ा शुरू हो चुका है। हालांकि , मेला प्रशासन की तैयारी तेज हो चुकी है। समझा जाता है कि कुंभ मेले में जलधारा और जनधारा का संगम होगा। फिलहाल ,जूना अखाड़े का वर्चस्व कायम हुआ बताया जा रहा है। इस बार बड़ी संख्या में विदेशियों के आने की भी संभावना है।

बता दें कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद में कुल 13 अखाड़े शामिल होते हैं। कुंभ मेले में जूना अखाड़े की ओर से स्नान की तिथियां घोषित कर दी गई हैं। लेकिन इस बीच अखाड़ा परिषद में रार और तकरार बढ़ गई है। पिछले दिनों उत्तरी हरिद्वार स्थित आश्रम में नया उदासीन अखाड़ा के पंजाब से आए संतों ने बैठक की। कहा कि हरिद्वार में नया उदासीन अखाड़ा में बैठे साधु-संत वर्षों से नकली देवताओं की पूजा-अर्चना कर रहे हैं। और कुंभ मेले में भी नकली देवताओं को शाही स्नान करवा रहे हैं। जबकि असली देवता पंजाब में हैं, जिनकी पूजा होती है।

उधर, निरंजनी गुट वाली अखाड़ा परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्र पुरी और महामंत्री श्रीमहंत हरिगिरि सहित कई साधु संतों की मौजूदगी में पंजाब से आए नया उदासीन अखाड़ा के सचिव गणेश दास महाराज ने कहा कि, जिन संतों ने नकली देवताओं की पूजा और स्नान कराकर असली देवताओं का अपमान किया है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और अखाड़े से बाहर किया जाएगा। इस बार निरंजनी अखाड़े वाली अखाड़ा परिषद के साथ कुंभ मेले में असली देवताओं को शाही स्नान कराया जाएगा। दरअसल, यह घमासान अखाड़ा परिषद में नेतृत्व और आंतरिक परंपराओं को लेकर है। अखाड़ा परिषद दो विरोधी गुटों में बंट चुकी है, नया उदासीन अखाड़े के भीतर पूजा का विवाद गहरा गया है और दोनों गुट 13 अखाड़ों के समर्थन के अलग-अलग दावे कर रहे हैं। एक गुट महंत रवींद्रपुरी और राजेंद्र दास के नेतृत्व का दावा करता है तो दूसरा गुट महंत रवींद्रपुरी और महंत हरि गिरि महाराज के साथ होने की बात कहता है। नया उदासीन अखाड़े के मुखिया महंत भगत राम हरिद्वार मुख्यालय को परंपरा का केंद्र बताते हैं, वहीं पंजाब गुट के स्वामी गणेश दास ने आरोप लगाया है कि कुंभ में वर्षों से असली देवताओं को छोड़कर नकली प्रतिमाओं से शाही स्नान कराया जा रहा है ।

दिलचस्प है कि पंजाब गुट ने आगामी कुंभ मेले में जूना अखाड़े के साथ मिलकर असली देवताओं का शाही स्नान कराने का ऐलान किया है। लेकिन आंतरिक कलह दूर नहीं हो रही है। उधर जूना अखाड़े ने स्नान की तिथियां भी घोषित कर दी हैं। जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक श्रीमहंत हरि गिरि महाराज ने बताया कि आगामी 21 नवंबर से अखाड़े की धार्मिक गतिविधियां प्रारंभ होंगी। कुंभ स्नान की दृष्टि से जूना अखाड़े के तीन अमृत स्नान यानी शाही निर्धारित किए गए हैं। पहला अमृत स्नान 6 मार्च 2027 (महाशिवरात्रि), दूसरा अमृत स्नान 8 मार्च 2027 (सोमवती अमावस्या) और तीसरा अमृत स्नान 14 अप्रैल 2027 (मेष संक्रांति) को होगा।

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